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Showing posts from 2019

शक्ति- एक विचार

शक्ति(power) कोई बुरी चीज नहीं है। लेकिन लोगो की माने तो शक्ति ही किसी के विघटन का मुख्य कारक बनती। 1980 के आसपास विदेश की एक चर्चित महिला मॉडल ने पुरुषों, महिलाओं और न्यूज़ रिपोर्टर्स को एक क्लब में आने का निमंत्रण दिया जहां उसने खुद को निर्वस्त्र कर सारे लोगो को मौका दिया कि वे वहाँ पर रखे सारे चीज़ जैसे फूल,कांटे, लकड़ी, चादर आदि का प्रयोग कर उसके शरीर के साथ 3-4 घंटे के लिए कुछ भी कर सकते है। पुरुषों और महिलाओं ने उसे उस 3-4 घंटे में तरह-तरह की यातनाएं दी। किसी ने उसके शरीर में कांटे चुभा दिए। किसी ने उसे रखे लकड़ी से मारा पीटा। किसी ने अलग तरह से उसके शरीर को हानि पहुंचाने की कोशिश की। जब समय खत्म हुआ तो उस मॉडल का शरीर बुरी तरह से छल्ली कर दिया गया था। जब प्रेस और मीडिया ने ऐसा करने का कारण पूछा तो उसने ये बताया कि वह लोगों की मनोस्थिति जानने के लिए एक experminet कर रही थी और उसके इस प्रयोग से ये निष्कर्ष निकला कि जब किसी को शक्ति या अधिकार दे दिया जाता हैं तो वो उसका दुरुपयोग ही करते है, उसका प्रयोग दूसरे की हानि पहुंचाने के लिए ही किया जाता है।  केवल पुरुष ही नहीं बल्क...

Why I am an athiest...

"For great men, religion is a way of making friends; small people make religion a fighting tool."- A.P.J. Abdul Kalam Yes, I am an atheist. I am proud of that. I am an atheist, that doesn't mean that I don't believe in God. I do believe in God. But my God is not connected to a particular religion. My God is omnipresent. He is the supreme power and he resides in everyone's heart. My God doesn't say that a particular person is the believer of a particular religion, so I will reside in his heart. He doesn't differentiate among Hindu,muslim, Jain, Bodh, Christian. He also doesn't differentiate among countries and their people . He is cosmopolitan. Have any of you ever thought that what we are doing. In ancient times, we were one. Every person on this Earth were one. Then people start dividing and conquering land. They separated our heaven "Earth" in the name of country. Then these countries were sub divided in state. Then some people st...

प्रकृति के विनाश का जिम्मेवार कौन??- एक सोच

प्रस्तावना- भारत के कुछ लोगो का कहना है कि भारतवर्ष मे कुछ भी perfect नहीं है। पीने का पानी उपलब्ध नहीं हैं। गंदगी का अंबार हैं। ट्रैन मे न ही coach साफ सुथरे है और न ही bathroom। Public places मे यत्र तत्र कूड़ा कचरा भरा हुआ हैं। मुख्य भाग- गर्मी मे पीने का पानी उपलब्ध न होने पर हम सरकार को दोष देते है। कहते है कि सरकार कुछ नहीं कर रही। भाई मानता हूँ मै कि पानी उपलब्ध न होने पर सरकार या उस क्षेत्र के अधिकारी दोषी हैं। पर क्या केवल सरकार का दोष हैं???? हमारे दोष का क्या???? जब पानी पर्याप्त मात्रा मे उपलब्ध होता है तो हम बेताहाशा उसका दुरुपयोग करते हैं। नल खुला छोड़ कर अन्य कामों मे लग जाते। "अरे, पानी तो आ ही रहा। बहने दो। क्या फर्क पड़ता है!!" है ना?? यही सोचते है ना हमसब?? आप सबको भलीभांति पता है कि Natural Resources सीमित हैं।। उनका अपव्यय करने से आप प्रकृति माँ के साथ खिलवाड़ कर रहे। अगर पानी को यू ही बर्बाद होते दिया गया, तो वो दिन दूर नहीं जब सरकार भी कुछ नहीं कर पायेंगी। वास्तविकता तो ये हैं कि वो बुरे दिन कुछ जगह प्रारंभ हो गए हैं। कुछ क्षेत्रो...

क्या भारत सच में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है?- एक विचार

प्रस्तावना- हाल ही मैं U.S. State Department के द्वारा निर्गत वार्षिक रिपोर्ट मे ये मंतव्य दिया गया कि भारत मे धार्मिक स्वतंत्रता की परिस्थिति दयनीय है और अल्पसंख्यक लोग की सुरक्षा करने मे भारत असमर्थ हैं। इस रिपोर्ट के जारी होने के अगले ही दिन हमारी विदेश मंत्रालय ने इस report की निंदा की और भारत के धर्मनिरपेक्ष होने की बात की । मुख्य भाग- भारत की प्रस्तावना जिसे सविंधान की "आत्मा" कहा जाता है, उसमे भारत को धर्मनिरपेक्ष होने की बात कही गयी है। लेकिन कुछ लोगों तथा कुछ संगठन(हाल में प्रस्तुत किया गया US रिपोर्ट) के अनुसार भारत धर्मनिरपेक्ष राज्य होने के योग्यता को पूरा नहीं कर रहा। इन लोगों की राय कुछ हद तक सच प्रतीत होती है। हाल ही मैं झारखंड के जमशेदपुर जिले मे मोब लिंचिंग(Mob Linching) का case सामने आया हैं जिसमें गुस्साएं भीड़ ने एक मुस्लिम व्यक्ति को मार मार कर अंत में उसकी जान ले ली। यही नहीं, उससे "जय श्री राम", "जय हनुमान" बोलने के लिए विवश किया गया, ये जानने के बाद भी की वो एक मुस्लिम व्यक्ति हैं । UP मे रमजान के पाक महीने में एक हिन्...