प्रकृति के विनाश का जिम्मेवार कौन??- एक सोच
प्रस्तावना- भारत के कुछ लोगो का कहना है कि भारतवर्ष मे कुछ भी perfect नहीं है। पीने का पानी उपलब्ध नहीं हैं। गंदगी का अंबार हैं। ट्रैन मे न ही coach साफ सुथरे है और न ही bathroom। Public places मे यत्र तत्र कूड़ा कचरा भरा हुआ हैं। मुख्य भाग- गर्मी मे पीने का पानी उपलब्ध न होने पर हम सरकार को दोष देते है। कहते है कि सरकार कुछ नहीं कर रही। भाई मानता हूँ मै कि पानी उपलब्ध न होने पर सरकार या उस क्षेत्र के अधिकारी दोषी हैं। पर क्या केवल सरकार का दोष हैं???? हमारे दोष का क्या???? जब पानी पर्याप्त मात्रा मे उपलब्ध होता है तो हम बेताहाशा उसका दुरुपयोग करते हैं। नल खुला छोड़ कर अन्य कामों मे लग जाते। "अरे, पानी तो आ ही रहा। बहने दो। क्या फर्क पड़ता है!!" है ना?? यही सोचते है ना हमसब?? आप सबको भलीभांति पता है कि Natural Resources सीमित हैं।। उनका अपव्यय करने से आप प्रकृति माँ के साथ खिलवाड़ कर रहे। अगर पानी को यू ही बर्बाद होते दिया गया, तो वो दिन दूर नहीं जब सरकार भी कुछ नहीं कर पायेंगी। वास्तविकता तो ये हैं कि वो बुरे दिन कुछ जगह प्रारंभ हो गए हैं। कुछ क्षेत्रो...