क्या भारत सच में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है?- एक विचार
प्रस्तावना-
हाल ही मैं U.S. State Department के द्वारा निर्गत वार्षिक रिपोर्ट मे ये मंतव्य दिया गया कि भारत मे धार्मिक स्वतंत्रता की परिस्थिति दयनीय है और अल्पसंख्यक लोग की सुरक्षा करने मे भारत असमर्थ हैं।
इस रिपोर्ट के जारी होने के अगले ही दिन हमारी विदेश मंत्रालय ने इस report की निंदा की और भारत के धर्मनिरपेक्ष होने की बात की ।
मुख्य भाग-
भारत की प्रस्तावना जिसे सविंधान की "आत्मा" कहा जाता है, उसमे भारत को धर्मनिरपेक्ष होने की बात कही गयी है। लेकिन कुछ लोगों तथा कुछ संगठन(हाल में प्रस्तुत किया गया US रिपोर्ट) के अनुसार भारत धर्मनिरपेक्ष राज्य होने के योग्यता को पूरा नहीं कर रहा।
इन लोगों की राय कुछ हद तक सच प्रतीत होती है। हाल ही मैं झारखंड के जमशेदपुर जिले मे मोब लिंचिंग(Mob Linching) का case सामने आया हैं जिसमें गुस्साएं भीड़ ने एक मुस्लिम व्यक्ति को मार मार कर अंत में उसकी जान ले ली। यही नहीं, उससे "जय श्री राम", "जय हनुमान" बोलने के लिए विवश किया गया, ये जानने के बाद भी की वो एक मुस्लिम व्यक्ति हैं ।
UP मे रमजान के पाक महीने में एक हिन्दू भाई को बस इस बात के लिए मार दिया गया क्योंकि उसने अपने सामान के लिए पैसे मांगे।
अब प्रश्न यह उठता हैं कि किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को मारना या बलपूर्वक किसी दूसरे धर्म का जयकारा लगवाना सही है??
मेरी राय में ये बिल्कुल ग़लत बात है।
नई सरकार केंद्र में बनने के बाद भी ऐसा ही कुछ हमारे संविधान के मंदिर "संसद" मे हुआ। वहाँ भी "अल्लाह हो अखबर", "जय श्री राम" के नारे की गूंज संसद मे गूँजती रही।
बहुत ही शर्म की बात है कि "संसद" जिसकी नीव संविधान द्वारा रखी गयी, उस मंदिर मे भी धर्म को लेकर संविधान के नियमों के तहत चुने गए उम्मीदवारों द्वारा लड़ाई होती रहती , ये जानने समझने के बाद भी की संविधान ने भारत को "धर्मनिरपेक्ष" बनाया हैं और इसका मान चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा संसद मे तो रखी ही जानी चाहिए।
उपरोक्त बातों से ये लगता हैं कि भारत धर्मनिरपेक्ष राज्य की योग्यता को खोता हुआ प्रतीत हो रहा है। लेकिन प्रतीत होने और सच होने मे बिल्कुल अंतर है।
मेरी राय में भारत औऱ भारत के लोग,जिसके इर्द गिर्द "प्रस्तावना" को बूना गया है, "धर्मनिरपेक्ष" होने के झंडे को थामे हुए है और हमारा देश भविष्य मे भी "धर्मनिरपेक्षता" को अक्षुण्ण बनाये रखेगा।
हमारे भारतवर्ष के लोग विभिन्न धर्म और सम्प्रदाय के होने के बाद भी एक हैं। कुछ विक्षिप्त लोग जो धर्म के नाम पर लोगों को लड़वाते रहते है और अपने स्वार्थ के लिए दूसरे धर्म के लोगों को विवश करते है, उनके व्यक्तिगत सोच से हमे आगे निकल कर देश के सर्वांगीण विकास के लिए "सामूहिक और सकारात्मक सोच" के साथ हमे पहल करना होगा।
ये देश जो कि विभिन्न धर्मों और सम्प्रदायों का संगम है, उसकी गरिमा और अखंडता को हम सारे भारत के नागरिक द्वारा बनाये रखना हैं।
उपसंहार-
भारत सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। जिस प्रकार China ने हाल ही मे USA तथा west देशों के अपने उच्च सभ्यता होने के सोच की निंदा की है और पूरे विश्व की सारी सभ्यता को एक कहा है और सारी सभ्यता को एक सूत्र मे बांधने की अपील की हैं, ये काम भारत को करना चाहिए था जिसके प्राचीन ऋषियों ने "वासुदेव कुटुंबकम" औऱ पूरे विश्व को एक कहने की बात कही हैं। 🙂
भारत सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। जिस प्रकार China ने हाल ही मे USA तथा west देशों के अपने उच्च सभ्यता होने के सोच की निंदा की है और पूरे विश्व की सारी सभ्यता को एक कहा है और सारी सभ्यता को एक सूत्र मे बांधने की अपील की हैं, ये काम भारत को करना चाहिए था जिसके प्राचीन ऋषियों ने "वासुदेव कुटुंबकम" औऱ पूरे विश्व को एक कहने की बात कही हैं। 🙂
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